4000 साल पहले लिखी गयी पुस्तक जिसका आज हमारे समाज में कोई पालन भी नहीं हो रहा है उसको जलाने से अपने आप को बहूत बुद्धिजीवी समझने वाले ये क्यों भूल जाते हैं कि भारत के संविधान में अब तक कितने संशोधन हो गये है। जला दो संविधान की उस पहली प्रति को भी जिसमें संशोधन नही किये गये थे। शायद इन लोगों ने संस्कृत पढ ली होती तो पता चलता कि भारत में केवल एक मनु द्वारा लिखित स्मृति ही नहीं है बल्कि बाद में समाज के अनुसार परिष्कृत होकर लिखी जाने वाली अनेक स्मृतियाँ हैं । जो एक के बाद एक परिष्कृत होकर समाज को यहाँ तक लेकर आयी हैं। हमनें कभी भी अपने आप को परिष्कृत करने के लिये रोका नहीं हैं। मनुस्मृति को जलाने वाले जरा अपनी आँख खोलकर देख लें कि कितनी स्मृतियाँ है। हमारी आज की स्मृति है हमारा संविधान। जिसमें भी भारत नें पिछले 65 साल मे 100 संशोधन किये हैं। ये है मेरा भारत जो हर समय अपने आप को बदलने को तैयार बैठा है। रुकता नहीं है वो। पहले उन सारी स्मृतियों को पढो और फिर संविधान को और तब आकर बात करना ...स्मृतियों की सूची संलग्न है।
धर्मसूत्र
गृह्यसूत्र
मनुस्मृति
याज्ञवल्क्य स्मृति
योगसूत्र और अन्य दर्शनों के सूत्र
आगम शास्त्र और अन्य शास्त्र
अत्रिस्मृति
विष्णुस्मृति
हरीतस्मृति
औषनासी स्मृति
अंगिरास्मृति
यम स्मृति
कात्यायन स्मृति
बृहस्पति स्मृति
पराशर स्मृति
व्यास स्मृति
दक्ष स्मृति
गौतम स्मृति
वशिष्ट स्मृति
आपस्ताम्भ स्मृति
संवर्तस्मृति
शंख स्मृति
लिखित स्मृति
देवल स्मृति
शातातप स्मृति
गृह्यसूत्र
मनुस्मृति
याज्ञवल्क्य स्मृति
योगसूत्र और अन्य दर्शनों के सूत्र
आगम शास्त्र और अन्य शास्त्र
अत्रिस्मृति
विष्णुस्मृति
हरीतस्मृति
औषनासी स्मृति
अंगिरास्मृति
यम स्मृति
कात्यायन स्मृति
बृहस्पति स्मृति
पराशर स्मृति
व्यास स्मृति
दक्ष स्मृति
गौतम स्मृति
वशिष्ट स्मृति
आपस्ताम्भ स्मृति
संवर्तस्मृति
शंख स्मृति
लिखित स्मृति
देवल स्मृति
शातातप स्मृति

No comments:
Post a Comment