Monday, 8 February 2016

नेता क्यों जीतते हैं..........


इस श्रंखला में हम प्रयास करेंगे कि वे हमारे राजनेता जो हमेशा एक संघर्ष में रहते हैं उनके जीवन में भी हर पल एक तनाव रहता है फिर वे कैसे उन तनावों को दूर करके आगे बठते हैं और हमेशा सफल रहते हैं।

सबसे पहले हम हमारे सबसे परिचित और जिनके साथ हमारा एक परिवार की तरह रिश्ता बना हुआ है और जो हमेशा हमारी टीम के लिये संस्कृत के कार्य हेतु सर्वदा  उपलब्ध रहते है उनसे बातचीत के कुछ अंश उन सभी लोगों के साथ बाँटनें का प्रयास कर रहें हैं जो अपने जीवन में कुछ करना चाहते हैं।............


कुछ दिन पहले AIMS में अपनी चिकित्सा सुश्रुसा कराने गये सीवान से पहली बार निर्दलीय और दूसरी बार भा.ज.पा. से निर्वाचित होकर आये मानीय सांसद ओमप्रकाश यादव जी हुई चर्चा के अविस्मरणीय पलों में से निकलकर आये वाक्य जो हर किसी को उसकी मंजिल तक पहूँचाने का दम रखते हैं।


  • पहले हमें अपने आप को पक्का करना होता है तभी हमारे साथ कोई चलने का साहस करता है। यदि हमारा हीं संकल्प अधुृरा है तो कोई हमारे साथ क्यों चलेगा। सीवान में शहाबुद्दीन के विरोध में बोलने का साहस कोई नहीं कर सकता था। उसका  ही एकछत्र राज्य था। सीवान की जनता के दुख और दर्द को देखकर लगा कि इसका अन्त कब होगा। लेकिन जब हमनें ये संकल्प ले लिया कि अब चाहे मृ्त्यु ही क्यों न हो जाये इस जुल्म की सत्ता को उखाडकर फेंक देना है तो फिर अनेक कठिनाईयों व बहुत सारे साथियों की हत्या हो जाने के बाद भी हमनें कभी पीछे मुडकर नहीं देखा और उसी का परिणाम ये रहा कि  पहली बार में ही निर्दलीय 65000 वोटों से चुनाव जीतकर लोकसभा पहूँचे। उस जुल्म और भय के वातावरण को नष्ट करनें मे वहाँ की जनता ने मुझे अवसर दिया।
  • यदि सामर्थ्य है तो कभी भी किसी के भी काम को मना मत करें क्योंकि वह सामर्थ्य ही हमें इसलिये दि गयी है कि हम काम कर सकें। 
  • हमेशा दूसरों की सहायता करो क्योंकि जब ईश्वर हमें देने में कंजूसी नही कर रहा तो फिर हम क्यों करें।
  • हमेशा मन को साफ रखें। 
  • अपने आस पास अच्छे लोगों को रहनें दे क्योंकि यदि हमारे आस पास गलत लोग होंगे तो वे आपको गलत सलाह देकर आपको व समाज को हानि पहूँचाने का काम करेंगें।
  • समाज के सुख और दुख दोनों में हमेशा साथ रहो। क्योंकि वे आपको अपने परिवार का सदस्य समझते हैं।

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